Haldighati Tourist Guide

हल्दीघाटी का नाम सुनते ही महाराणा प्रताप द्वारा मातृभूमि के स्वाभिमान की रक्षार्थ लड़े गये ऐतिहासिक जनयुद्ध का स्मरण आ जाता है। हल्दीघाटी का युद्ध तंग पहाड़ी दर्रे से खमनोर के मैदान में बनास नदी तक लड़ा गया था। आज उसका कुछ स्वरुप ही संरक्षित रह पाया है । खमनोर से बलीचा गांव तक छः किलोमीटर में फैला रणक्षेत्र हल्दीघाटी के नाम से जाना पहचाना जाता है। यहाँ सरकारी तौर पर बनने वाला संग्रहालय भ्रष्टाचार के चलते आज तक बन नहीं सका। महाराणा प्रताप एवं चेतक से जुडी शस्त्र सामग्री उदयपुर सिटी पैलेस संग्रहालय में सुरक्षित है।
हल्दीघाटी में संग्रहालय के नाम से निजी दुकानदारी को बढ़ावा दिया गया है । पर्यटक मूल स्थलों को देखने से वंचित रहते है जो कि पूर्णतः निःशुल्क है।

हमारा प्रयास है कि इतिहास प्रेमी मूल स्थलों को देख शहीदों को नमन कर सके।

हल्दीघाटी के मुख्य दर्शनीय स्थल –

युद्धभूमि रक्त तलाई, खमनोर – हल्दीघाटी का मूल रणक्षेत्र है जहाँ आज भी शहीदों की स्मृति में छतरियां एवं स्मारक मौजूद है।





* मुुुग़ल पडाव बादशाही बाग़ , खमनोर – हल्दीघाटी

* हल्दीघाटी का मूल दर्रा – खमनोर – हल्दीघाटी

* प्रताप गुफा – बलीचा
* चेतक समाधी,बलीचा
* महाराणा प्रताप राष्ट्रीय स्मारक,बलीचा

 

भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग का प्रस्ताव पारित – प्रताप पुण्यतिथि 2018

वीर शिरोमणि ,प्रातः स्मरणीय महाराणा प्रताप की रणस्थली हल्दीघाटी के विकास की आड़ में बरसों से चली आ रही लीपापोती से आहत क्षेत्र के युवाओं ने इसके समाधान न होने तक सैद्धांतिक स्वाभिमानी संघर्ष का ऐलान किया है। 
हल्दीघाटी पर्यटन विकास समिति ने 19 जनवरी 2018 को वीर प्रताप की पुण्यतिथि पर जिला कलेक्टर को ज्ञापन देकर मेवाड़ कॉम्प्लेक्स योजना के तहत हल्दीघाटी में कराये गए वर्तमान तक के कार्यो में स्थानीय पर्यटक माफिया की संदिग्ध भूमिका से अवगत कराते हुए अधूरे पड़े स्मारक के संरक्षण की मांग की । महाराणा प्रताप से जुडी एक भी ऐतिहासिक सामग्री का प्रदर्शन न कर नकली वस्तुओं के संग्रह को संग्रहालय का नाम देकर पर्यटकों से धोखाधड़ी के खिलाफ प्रदर्शन किया ।
ज्ञात रहे कि हल्दीघाटी के जनयुद्ध की साक्षी रण धरा रक्त तलाई से लेकर राष्ट्रीय स्मारक तक संरक्षण के अभाव में उपेक्षित है व महाराणा प्रताप के नाम पर रोटियां सेकी जा रही है। स्मारक के विकास हेतु आरक्षित भूमि का भ्रष्टाचार से आवंटन किया गया व वर्तमान में भी एक पहाड़ी को नष्ट कर हल्दीघाटी का प्राकृतिक स्वरुप नष्ट कर निजी दुकान के लिए पार्किंग का इस्तेमाल किया जा रहा है। पूर्व में अतिक्रमण नही करने हेतु पाबंद भ्रष्ट पूंजीवादी द्वारा पुनः अतिक्रमण कर नाले को भराव से भर पर्यावरण का नुकसान किया गया है। महाराणा प्रताप स्मृति संस्थान के जिम्मे चल रहे राष्ट्रीय स्मारक की दुर्दशा हेतु जिम्मेदार निजी संग्रहालय मालिक द्वारा संस्थान के संस्थापक होने का नाजायज लाभ उठा कर मात्र 15 साल में हल्दीघाटी की परिभाषा बदल दी गई है। वर्तमान में पर्यटक सड़क किनारें लगे कथित संग्रहालय के बोर्ड को देख सीधे बलीचा में 100 रूपये का भुगतान कर मूल स्थलों को देख पाने से वंचित रहते है। प्रशासनिक स्तर पर नजरअंदाज होना मिलीभगत का संदेह पैदा करता है। हल्दीघाटी पर्यटन विकास समिति द्वारा ज्ञापन के जरिये निश्चित समय सीमा में समाधान की मांग की  व पूरी नहीं होने की दशा में जन आंदोलन का आगाज किया जायेगा।