महाराणा प्रताप की 478वीं जयंती 16 जून को – हल्दीघाटी युद्ध तिथि 18 जून को होगा दीप महोत्सव

“अन्याय व अधर्म का विनाश करना संपूर्ण मानव जाति का कर्तव्य है।” ~महाराणा प्रताप

वीर शिरोमणि, प्रातः स्मरणीय, हिंदुआ सूरज महाराणा प्रताप की 478वीं जयंती तिथि के अनुसार ज्येष्ठ सुदी तृतीया दिनांक 16 जून 2018 को देशभर में धूमधाम से मनायी जायेगी। पंचायत समिति खमनोर का प्रताप जयंती मेला स्वतंत्रता सैनानियों की स्वाभिमानी ज्योत के रूप में आज भी हमें गौरवान्वित करता है। पूर्व में यह मेला सात दिवसीय होकर दूरदराज से आने वाले मेलार्थियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा था। स्थानीय ग्रामीण व बाहर के व्यापारी शाहीबाग में पेड़ों की छांव तले अपना रोजगार लगाते थे। पंच सरपंच सम्मेलन आयोजित होते व ग्रामीण स्थानीय प्रतिभाएं अपनी कला का प्रदर्शन करती थी। कई समस्याओं के समाधान हेतु हल्दीघाटी से उठने वाली हुंकार से भी समाधान प्राप्त किये जाते थे। अब समय बदल रहा है। स्थानीय जन भागीदारी भी शत प्रतिशत नहीं रही है। आज मानव समाज जातियों के आधार पर व्यवहार करने लगा है। समाज की रैलियों में हजारों युवा एकत्रित होने लग गये लेकिन प्रताप की सांप्रदायिक एकता को भुला सी दी है। मानव धर्म से बढ़कर अन्यथा कुछ श्रेष्ठ नहीं जान कर ही हकीम खान पठान ने मेवाड़ी सेना का नेतृत्व किया व आदिवासियों ने क्षत्रियों का साथ दिया । दुश्मन अकबर की सेना के क्षत्रिय शाही सेनापति जयपुर के राजा मान सिंह के खिलाफ हल्दीघाटी का युद्ध एक जनयुद्ध रहा। रक्त तलाई स्थित सतियों का चबूतरा,झाला मान सिंह – बड़ी सादड़ी एवं ग्वालियर नरेश रामशाह तंवर की पुत्रों सहित छतरियां व हकीम खान की मजार देश के स्वाभिमान की रक्षा में सर्व समाज की दी गई आहुतियों का प्रतीक है। संयोग से इस वर्ष प्रताप जयंती 16 जून को आरम्भ होने वाला ऐतिहासिक मेला हल्दीघाटी युद्धतिथि 18 जून को संपन्न होगा।
आम जनता के हृदय में विश्राम कर रहे प्रताप को जगाने का समय है।
वर्तमान में यह मेला जनता की सहभागिता कम होने से तीन दिवसीय हो गया है। प्रताप भक्त जय हल्दीघाटी नवयुवक मंडल की निकाले जाने वाली शोभायात्रा ही इस मेले का मुख्य आकर्षण मात्र रही है। पंचायत समिति के प्रयासों से पर्यटन विभाग द्वारा सांस्कृतिक संध्या इसमें विशेष केंद्र बिंदु है। खेलकूद प्रतियोगिताओं के सफल प्रयासों में जन भागीदारी अत्यंत आवश्यक हैं।
21 जून 1976 को हल्दीघाटी युद्ध की 400 वीं तिथि पर पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्रीमती इंदिरा गांधी ने प्रताप के जीवन से जुड़े स्थलों के विकास हेतु मेवाड़ कॉम्प्लेक्स योजना की घोषणा की थी। युद्धतिथि 18 जून 1997 को तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री इंद्रकुमार गुजराल ,पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी, मुख्यमंत्री श्री भेरूसिंह शेखावत व अन्य विशिष्ठ अतिथियों ने रक्त तलाई स्थित शहीद स्मारकों पर श्रद्धासुमन अर्पित कर महाराणा प्रताप राष्ट्रीय स्मारक की नींव रखी थी। 21 जून 2009 को महाराणा प्रताप स्मारक के नाम से पर्यटन विभाग द्वारा इसका लोकार्पण तत्कालीन केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री श्री सी.पी. जोशी, राज्य पर्यटन मंत्री श्रीमती बीना काक, खेल मंत्री श्री मांगीलाल गरासिया आदि से करा दिया गया। 1997 में घोषित यहाँ बनने वाला संग्रहालय भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। आज भी स्मारक को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा प्राप्त नहीं हो सका है। यह खुलासा करते हुए स्थानीय सांसद श्री हरिओम सिंह राठौड़ ने हल्दीघाटी के विकास में विपक्ष पर महाराणा प्रताप के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया है।

प्रतिवर्ष की भाँति जय राजपूताना संघ भी राजसमन्द जिला मुख्यालय से हल्दीघाटी तक महाराणा प्रताप जयंती शोभायात्रा निकालेगा।  प्रताप जयंती के अवसर पर ही दो दिन पूर्व 14 व 15 जून को महाराणा प्रताप के पुत्र अमरसिंह की जन्मस्थली मचिंद में भी ग्राम पंचायत मचिंद द्वारा दो दिवसीय मेले का आयोजन किया जायेगा।

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18 जून 1576 हल्दीघाटी युद्ध के ऐतिहासिक महत्त्व को देखते हुए 18 जून 2008 से स्थानीय आम पर्यटन विकास प्रेमियों की हल्दीघाटी पर्यटन समिति द्वारा ब्रह्मशक्ति नवयुवक मंडल,जय हल्दीघाटी नवयुवक मंडल,संस्कार मित्र मंडल,प्रताप मंच,हल्दीघाटी प्रेस क्लब सहित स्थानीय युवाओं के सहयोग से शहीदों की स्मृति में दीप प्रज्वलन कर वीरता दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष भी हल्दीघाटी युद्धतिथि 18 जून 2018 को ग्यारहवाँ दीप महोत्सव आयोजित किया जायेगा। आप सभी इष्ट मित्रों सहित 16 जून प्रातः 7 बजे रक्त तलाई से निकलने वाली भव्य शोभायात्रा में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें एवं युद्ध तिथि 18 जून सायंकाल रक्त तलाई हल्दीघाटी के मुख्य रण प्रांगण में शहीदों की स्मृति में दीप प्रज्वलन कर स्वयं को गौरवान्वित महसूस करे।

Haldighati Tourist Guide

हल्दीघाटी के मुख्य दर्शनीय स्थल –

रक्त तलाई, खमनोर – हल्दीघाटी का मूल रणक्षेत्र जहाँ आज भी शहीदों के स्मारक मौजूद है।





* शाही बाग, खमनोर – हल्दीघाटी

* हल्दीघाटी मूल दर्रा – खमनोर – हल्दीघाटी

* प्रताप गुफा – बलीचा
* चेतक समाधी,बलीचा
* महाराणा प्रताप राष्ट्रीय स्मारक,बलीचा