युद्धभूमि रक्ततलाई हल्दीघाटी में हार्दिक स्वागत

 

मेवाड़ के अमर तीर्थ रक्ततलाई हल्दीघाटी में आपका स्वागत कर सूचित करना चाहते हैं कि सरकारी स्तर पर ख़मनोर व बलीचा के 6 किलोमीटर में फैले हल्दीघाटी के मुख्य दर्शनीय स्थलों पर भ्रमण हेतु कोई शुल्क नहीं लिया जाता है। मुख्य युद्धस्थल रक्ततलाई से स्मारक तक सभी जगह निःशुल्क प्रवेश है। संग्रहालय के नाम से बरसों से पनप रहे भ्रष्टाचार से पर्यटक भ्रमित है। पूर्व के सरकारी ठेकेदार द्वारा सरकारी चेतक गेस्ट हाउस के बंद होने व राजकीय संग्रहालय नहीं होने से पर्यटकों से वसूली कर भगवान राम के वंशज महाराणा प्रताप के नाम पर सिर्फ पेट पाला जा रहा है। मूल हल्दीघाटी के विकास में यह निजी दुकानदारी सबसे बड़ा रोड़ा बन कर सामने है।

Haldighati Tourist Guide

‘थर्मोपल्ली ऑफ़ मेवाड़’ के नाम से विश्व विख्यात हल्दीघाटी का नाम सुनते ही महाराणा प्रताप द्वारा मातृभूमि के स्वाभिमान की रक्षार्थ लड़े गये ऐतिहासिक जनयुद्ध का स्मरण आ जाता है। हल्दीघाटी का युद्ध तंग पहाड़ी दर्रे से खमनोर के मैदान में बनास नदी तक लड़ा गया था। आज उसका कुछ स्वरुप ही संरक्षित रह पाया है । खमनोर से बलीचा गांव तक छः किलोमीटर में फैला रणक्षेत्र हल्दीघाटी के नाम से जाना पहचाना जाता है। यहाँ सरकारी स्तर पर बनने वाला संग्रहालय भ्रष्टाचार के चलते आज तक बन नहीं सका। महाराणा प्रताप एवं चेतक से जुडी शस्त्र सामग्री उदयपुर सिटी पैलेस संग्रहालय में सुरक्षित है।
हल्दीघाटी में संग्रहालय के नाम से निजी दुकानदारी को बढ़ावा दिया गया है । पर्यटक मूल स्थलों को देखने से वंचित रहते है जो कि पूर्णतः निःशुल्क है।

हमारा प्रयास है कि इतिहास प्रेमी मूल स्थलों को देख शहीदों को नमन कर सके।

हल्दीघाटी के मुख्य दर्शनीय स्थल –

युद्धभूमि रक्त तलाई, खमनोर – हल्दीघाटी का मूल रणक्षेत्र है जहाँ आज भी शहीदों की स्मृति में छतरियां एवं स्मारक मौजूद है।





* मुुुग़ल पडाव बादशाही बाग़ , खमनोर – हल्दीघाटी

* हल्दीघाटी का मूल दर्रा – खमनोर – हल्दीघाटी

* प्रताप गुफा – बलीचा
* चेतक समाधी,बलीचा
* महाराणा प्रताप राष्ट्रीय स्मारक,बलीचा