वीरभूमि दर्शन + संपर्क
खमनोर गाँव में स्थित। यहाँ 18 जून 1576 को भयंकर युद्ध हुआ। कर्नल टॉड के अनुसार तालाब का पानी खून से लाल हो गया था। झाला मान यहीं बलिदान हुए।
बलिचा गाँव में स्थित। वफादार अश्व चेतक ने यहाँ अंतिम सांस ली। पत्थर का स्मारक आज भी मौजूद है। प्रताप को सुरक्षित पहुँचाकर शहीद हुआ।
झाला मान की याद में बना तालाब। राजचिह्न धारण कर मुगल सेना को पूर्व की ओर खदेड़ते हुए यहाँ बलिदान हुए।
21 जून 2009 को उद्घाटन। महाराणा प्रताप की अश्वारूढ़ प्रतिमा। डॉ. सी.पी. जोशी, बीना काक की उपस्थिति में बना। वर्तमान में उपेक्षित।
अरावली के बीच संकरा रास्ता। हल्दी जैसी पीली मिट्टी। मेवाड़ वंश की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका। गुरिल्ला युद्ध का केंद्र।
विश्व प्रसिद्ध चैत्री गुलाब उत्पाद। मोलेला की मृण कलाकृतियाँ। ग्रामीण पर्यटन का आधार।
स्थान: खमनोर, राजसमंद, राजस्थान 313333
फोन: +91-9413026791
समय: सुबह 6 बजे - शाम 7 बजे
दूरी: उदयपुर 44 किमी | नाथद्वारा 16 किमी
WhatsApp बुकिंग कॉल करेंवर्तमान में राष्ट्रीय स्मारक बुरी तरह से उपेक्षित है। प्रशासन के संरक्षण में, निजी प्रदर्शनी बलिचा गांव में हल्दीघाटी के मुख्य हिस्से के रूप में एक नया अमानक इतिहास रच रहा है और राष्ट्रीय स्मारक के निकट अतिक्रमण कर पहाड़ियों को नष्ट कर रहा है।
हमें हल्दीघाटी में ग्रामीण पर्यटन के उत्थान के साथ-साथ इस स्थान की महिमा को बनाए रखने के लिए अभी भी प्रोत्साहन की आवश्यकता है।
कृपया प्रमाणित लोकल गाइड के साथ ही रक्ततलाई, खमनोर, चेतक समाधि जैसे वास्तविक युद्धस्थलों का दर्शन करें।