महाराणा प्रताप की 421वीं पुण्यतिथि पर राष्ट्र प्रेम प्रतिज्ञा

जय प्रताप – जय मेवाड़ !!

प्रातः स्मरणीय, वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की 421वीं पुण्यतिथि 19 जनवरी 2018 से मेवाड़ के महामंत्र को दोहराते हुए समस्त हिंदुस्तानी मानव समाज को जागना होगा। हमारे आसपास चल रहे भ्रष्टाचार से लड़ना व विजयी होने का समय आ चुका है।
मेवाड़ का विश्वविदित स्वर्णाक्षरों में अंकित यह मंत्र जीवन का सार है।

।। मेवाड़ी महामंत्र है सब ग्रंथन को सार,जो दृढ़ राखे धर्म को तिहि राखे करतार ।।

शूरवीर महाराणा प्रताप के साथ रणधरा हल्दीघाटी में देश धर्म की रक्षार्थ अपने प्राण आहूत करने वाले अमर सैनानियों का सम्मान दिल से किया जाना चाहिए। राष्ट्रप्रेम के अमर प्रथम सैनानी महाराणा प्रताप के जन्मस्थल से लेकर रणभूमि व निर्वाण स्थल को राष्ट्रीय तीर्थ घोषित किया जाना चाहिए।
राजसमन्द जिले की ग्राम पंचायत खमनोर स्थित रक्त तलाई से लेकर महाराणा प्रताप राष्ट्रीय स्मारक तक की समूची हमारी ऐतिहासिक धरोहर संरक्षित व विकसित हो यह संकल्प लेने की आवश्यकता है।
कुम्भलगढ़ व दिवेर में स्थानीय वाशिंदों की सक्रीयता व सतर्कता से अच्छा विकास हुआ है। हल्दीघाटी का राष्ट्रीय स्मारक 2009 से भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ बदहाल हालात में है।
एकलिंगनाथ के दीवान महाराणा प्रताप ने अधर्म के खिलाफ प्रतिज्ञा ली थी –
जब तक मैं शत्रुओं से अपनी पावन मातृभूमि को मुक्त नही करा लेता, तब तक न तो मैं महलों में रहूंगा, न शैय्या पर सोंऊगा और न सोने चांदी अथवा किसी धातु के पात्र में भोजन करुंगा । वृक्षों की छांव ही मेरे महल, घास ही मेरा बिछौना और पत्ते ही मेरे भोजन करने के पात्र होगें । ”
वर्तमान में बाड़ ही खेत को खा रही हो तो हमे क्या प्रतिज्ञा लेना उचित होगा ?यह विचारणीय है।

जब तक हल्दीघाटी का सर्वांगीण विकास नहीं हो जाता एवं आम आदमी के साथ महाराणा प्रताप के नाम हो रही ठगी व सरकारी भूमि पर अतिक्रमण को रोका नहीं जाता यह संघर्ष जारी रहेगा।